पुण्यतिथि: एकात्म मानव दर्शन के महान प्रणेता थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय

 


भारत माँ की गोद में ऐसे कई महान नेताओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने देश और समाज को नई राह दिखाई है। इनमें से एक नेता थे पंडित दीनदयाल उपाध्याय। उन्होंने देश की राजनीति को इस तरह से एकजुट किया था कि लोग उन्हें एकात्म मानवतावाद का पुरोधा मानते थे। देश आज इस एकात्म मानव दर्शन के महान प्रणेता की पुण्यतिथि मना रहा है। गुजरात और राजस्थान के कई बड़े नेताओं सहित जनता उन्हें स्वदेसी सोश मीडिया मंच कू ऐप पर श्रद्धांजलि देती नज़र आ रही है। इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री, भूपेंद्र पटेल ने कू के माध्यम से कहा है: “हमारी राष्ट्रीयता का आधार भारत ही नहीं, भारत माता है। माँ शब्द हटा दिया जाए तो भारत भूमि का टुकड़ा रह जाएगा। -पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी। एकात्म मानव दर्शन के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि।”

वहीं, भाजपा गुजरात ने अपने ऑफिशियल कू हैंडल के माध्यम से कहा है: “ये दीनदयाल जी ही थे जिन्होंने भारत की राष्ट्रनीति, अर्थनीति, समाजनीति, राजनीति इन सभी पहलुओं पर भारत के अथाह सामर्थ्य के हिसाब से तय करने की बात बड़ी मुखरता से कही थी, लिखी थी। - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी #narendramodi #bjpgujrat“
देश के पहले बहुभाषी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू ऐप पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गजेंद्र सिंह शेखावत कहते हैं: “एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के पुरोधा, प्रखर राष्ट्रवादी, कुशल संगठनकर्ता श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर श्रद्धांजलि। राष्ट्रोत्थान तथा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए पंडित दीनदयाल जी ने जीवन पर्यंत अविस्मरणीय योगदान दिया। आपका जीवन हम सभी भारतीयों के लिए प्रेरणादायी है।“
Koo App
एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के पुरोधा, प्रखर राष्ट्रवादी, कुशल संगठनकर्ता श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर श्रद्धांजलि। राष्ट्रोत्थान तथा समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए पंडित दीनदयाल जी ने जीवन पर्यंत अविस्मरणीय योगदान दिया। आपका जीवन हम सभी भारतीयों के लिए प्रेरणादायी है।. - Gajendra Singh Shekhawat (@gssjodhpur) 11 Feb 2022
भाजपा के राज्य महासचिव और सवाई माधोपुर, राजस्थान की पूर्व विधायक दिया कुमारी सोश मीडिया ऐप कू के माध्यम से श्रद्धांजलि देते हुए कहती हैं: “भारतीय जनसंघ के संस्थापक, हमारे पथ प्रदर्शक, प्रखर राष्ट्रवादी, उत्कृष्ट संगठनकर्ता एवं अंत्योदय के प्रणेता परम श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि 'समर्पण दिवस' पर सादर नमन। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने राजनीति से परे रहकर राष्ट्र को सर्वोपरि माना।“
जबकि सूरत से विधायक, पूर्णेश मोदी ने प्रधानमंत्री की पोस्ट का चयन करते हुए कहा: “हम जैसे-जैसे दीनदयाल जी के बारे में सोचते हैं, बोलते हैं, सुनते हैं, उनके विचारों में हमें हर बार एक नवीनता का अनुभव होता है। - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी“
सूरत की महापौर हेमाली बोघवाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कू ऐप पर कहती हैं: “एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता हमारे प्रेरणास्रोत श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को पुण्यतिथि पर विनम्र अभिवादन। #deendayalupadhya“
केंद्रीय संसदीय कार्य और संस्कृति राज्य मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल कहते हैं: “प्रखर राष्ट्रवादी, उत्कृष्ट संगठनकर्ता, अंत्योदय एवं एकात्म मानववाद के प्रणेता, हमारे पथ प्रदर्शक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन।“
पंडित दीन दयाल उपाध्याय के बारे में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर, 1916 को उत्तर प्रदेश स्थित ब्रज के मथुरा जिले के छोटे से गाँव 'नगला चंद्रभान' में हुआ था। आजादी से पहले और आजादी के बाद भी उन्होंने अपने लेखन कार्य और सामाजिक कार्यों से जनता की सेवा की। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय एकता को अपना मिशन बना लिया। पं. दीनदयाल जी अक्सर कहा करते थे कि मैले कुचैले अनपढ़ लोग हमारे नारायण हैं, हमें उनकी पूजा करना चाहिए। यह हमारा सामाजिक और मानव धर्म है। पं. दीनदयाल उपाध्याय सच्चे अर्थों में युगपुरुष थे। उनका व्यक्तित्व राष्ट्रीय चिंतन, उच्च विचारों तथा मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण था। वे दरिद्र नारायण को अपना आराध्य मानते थे। दीनदयाल उपाध्याय जी के अनमोल वचन जब राज्य में आर्थिक एवं राजनीतिक दोनों शक्तियाँ आ जाती हैं, तो इसका परिणाम धर्म की गिरावट होता है। पिछले 1000 वर्षों में हमने जो भी अपनाया है, फिर चाहे हमने उसे मजबूरन अपनाया हो या इच्छा से, हम उसे त्याग नहीं सकते हैं। स्वतंत्रता का तभी कोई अर्थ है, जब हम हमारी संस्कृति को व्यक्त करने के लिए साधन बनें। नैतिकता के सिद्धांत किसी भी व्यक्ति द्वारा नहीं बनाए जाते, बल्कि उन्हें खोजा जाता है। भारत में नैतिकता के सिद्धांत को धर्म के रूप में जाना जाता है, यह जीवन का नियम है।
Topics

Top Post Ad

Below Post Ad

g ads